देहरादून-यह स्वर्ण जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नवसंकल्प का क्षण है। बीते वर्षों में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक ज्ञान की पहुँच सुनिश्चित की है। उत्तराखण्ड के युवाओं में नवाचार, अनुसंधान और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को प्रोत्साहित करने में विश्वविद्यालय का योगदान प्रशंसनीय है।
मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भी यह विश्वविद्यालय ज्ञान, संस्कार व नवाचार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।
