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आज से पर्वतीय क्षेत्र खासतौर से कुमाऊं में सावन मास का प्रारंभ हो गया है आज पहाड़ में हरेला काटा जाता है सात साबुत अनाज 9 दिन पहले या 7 दिन पहले बोए जाते हैं और फिर भगवान शंकर का परिवार मिट्टी से बनाया जाता है शंकर जी की मूर्ति पार्वती की गणेश जी की गणेश जी की दोनों पत्नियों की मूर्ति बनाई जाती है और इन प्रतिमाओं को कुमाऊं में डिकरे कहा जाता है और इन डिकरों की पूजा की जाती है और फिर उन प्रतिमाओं की पूजा की जाती है और हरेले से एक दिन पहले और आज हरेला काटा जाता है। पुए बनाए जाते हैं सूजी के और आज वृक्षारोपण भी किया जाता है क्योंकि हमारा देश कृषि प्रधान देश कहलाता है और यहां पर हर चीज फसलों से जुड़ी हुई है पहाड़ों में जो बाजरा मक्का दालें बोई जाती है इसीलिए प्रतीक रूप में उन्हें घर में भी लगाया जाता है हरेला के रूप में। और भगवान शंकर से प्रार्थना की जाती है कि उनकी फसल अच्छी हो

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