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रामनगर-कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के लिए मानसून में लागू की गई नई परमिट व्यवस्था विवादों में घिर गई है,ऑनलाइन और ऑफलाइन परमिट प्रणाली के साथ-साथ रोटेशन और नॉन-रोटेशन सिस्टम को लेकर जिप्सी कारोबारियों के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं,दोनों पक्षों ने कॉर्बेट कार्यालय पहुंचकर डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा से मुलाकात की, जहां उनके बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली.
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मॉनसून सीजन के दौरान जंगल सफारी के लिए लागू की गई नई परमिट व्यवस्था विवाद का कारण बन गई है,ऑनलाइन और ऑफलाइन परमिट प्रक्रिया के साथ-साथ रोटेशन और नॉन-रोटेशन सिस्टम को लेकर जिप्सी कारोबारियों के दो गुट खुलकर आमने-सामने आ गए हैं,शनिवार को दोनों पक्ष कॉर्बेट कार्यालय पहुंचे और डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा से मुलाकात कर अपनी-अपनी मांगें रखीं,इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई।दरअसल कॉर्बेट प्रशासन ने मॉनसून सीजन में व्यवस्था बनाई थी कि यदि ऑनलाइन बुकिंग के बाद कुछ परमिट खाली रह जाते हैं तो सफारी शुरू होने से ढाई घंटे पहले तक पर्यटक रिसेप्शन सेंटर पहुंचकर मैनुअल तरीके से ऑफलाइन परमिट ले सकते हैं,इस व्यवस्था में पर्यटक अपनी पसंद की जिप्सी का चयन भी कर सकते थे, इसी व्यवस्था को लेकर विवाद शुरू हुआ,वर्तमान जिप्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश छिम्वाल ने कहा कि असली विवाद ऑनलाइन और ऑफलाइन का नहीं, बल्कि रोटेशन और नॉन-रोटेशन सिस्टम का है,उनका कहना है कि विभाग को किसी एक पक्ष के हित में नहीं बल्कि सभी जिप्सी स्वामियों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए,उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था से जिप्सी स्वामियों के बीच गुटबाजी बढ़ रही है,उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग मतदान कराकर तय करे कि अधिकांश जिप्सी स्वामी किस व्यवस्था के पक्ष में हैं और उसी के अनुसार पारदर्शी नीति लागू की जाए, उनका कहना था कि यदि यह विवाद समाप्त नहीं हुआ तो पर्यटन और आपसी सौहार्द दोनों प्रभावित होंगे।वहीं पूर्व जिप्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम मेहरा ने ऑनलाइन व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से ऑनलाइन परमिट प्रणाली सफलतापूर्वक संचालित हो रही है और इससे पर्यटकों को सुविधा मिलती है,उन्होंने आरोप लगाया कि ऑफलाइन परमिट व्यवस्था से कुछ लोग मनमानी कर रहे हैं और इसका दुरुपयोग कर रहे हैं, उनका कहना था कि जब लगभग सभी सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं तो कॉर्बेट की सफारी परमिट व्यवस्था भी पूरी तरह ऑनलाइन ही रहनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि रिसेप्शन सेंटर से मैनुअल परमिट जारी करने की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त की जाए।मामले पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि मॉनसून सीजन में पहले सफारी शुरू होने से ढाई घंटे पहले तक ऑनलाइन बुकिंग बंद हो जाती थी और उसके बाद बची हुई सीटों के लिए ऑफलाइन व्यवस्था लागू की गई थी,हालांकि यह व्यवस्था अपेक्षित रूप से सफल नहीं रही,इसलिए अब संशोधन करते हुए सफारी शुरू होने से आधे घंटे पहले तक ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा दे दी गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यही व्यवस्था लागू रहेगी और यदि भविष्य में इसमें किसी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी तो उस पर भी विचार किया जाएगा।

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